प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
अगस्त 2015
अंक -43

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

कविताएँ

अनुशासन

हर इंसान हो सकता है सफल ,
सफलता मांगती है अनुशासन ।
सफल हो गया हर वो इंसान ,
जिसने कर लिया खुद का खुद पर शासन ।।

अनुशासन शब्द नहीं किसी गीत का ,
अनुशासन सुर नहीं किसी संगीत का ।
अनुशासन बंधन नहीं किसी प्रीत का ,
अनुशासन तो रहस्य है सफलता की रीत का ।।

अनुशासन ही तो अंतर है ,
पीतल और सोने का ।
अनुशासन ही नहीं जब जीवन में ,
फिर अर्थ क्या है मानव होने का ।।

अनुशासन नहीं कोई बाधा ,
अनुशासन तो एक वरदान है जिंदगी में ।
पूजा करें अगर इसकी तो ,
अनुशासन भी एक भगवान है जिंदगी में ।।

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जीवन मृत्यु का संग्राम


जीवन मृत्यु का संग्राम है यह,
डर मत कूद जा तुझसे आहवान है यह।
लाख पुण्यो का परिणाम है यह,
मनुष्य जीवन महान है यह।
सो मत ! जाग ! कर्म को भाग,
आत्मा का सम्मान है यह।
जीवन मृत्यु का संग्राम है यह,
डर मत कूद जा तुझसे आहवान है यह।।

कुछ तय किया, निर्णय लिया तुम्हे जन्म दिया,
गलत नहीं ईश्वर महान है यह ।
औरो के लिए जीकर औरो की खातिर मर जाना,
बस मानव का ही अभिमान है यह।
जीवन मृत्यु का संग्राम है यह,
डर मत कूद जा तुझसे आहवान है यह।।

दास बन जा किसी का या दास बना किसी को,
आज समय है तेरे पास महान इतिहास बना इसी को ।
चलता सूरज बहता नीर है यह,
पल बीत जायेगा समय नाशवान है यह।
किन्तु, परन्तु, हो सकता था, ना क्रर पाया
सब बहाने है हर के,
बोल मुझे स्वीकार है, मेरा ही अधिकार है,
तेरी जीत का पहला निशान है यह ।
जीवन मृत्यु का संग्राम है यह,
डर मत कूद जा तुझसे आहवान है यह।।


- सुरेन बिश्नोई