प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
मार्च 2018
अंक -38

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

बाल-वाटिका

बड़े मज़े का गाँव जी

सोनू-मोनू खेल रचाते,
बगिया की इक छाँव जी।
केला-अमरुद, सेव-संतरे,
लदे-भरे हर ठाँव जी।।

चहुँ ओर है मनभावन,
रंग-बिरंगे फूल जी।
नदी किनारे गैया चरती,
सुधबुध अपनी भूल जी।
आकर सुबह-शाम नित कौवा,
करता काँव -काँव जी।।

झर-झर, झर-झर झरनें झरते,
नदियाँ करती कल-कल जी।
हरे-भरे जहाँ पेड़ घनेरे,
खुशियाँ बाँटे हरपल जी।
ऐसा सुंदर दृश्य देखकर,
थम-थम जाते पाँव जी।।

भोले-भाले, सीधे-सादे,
अजब निराले लोग जी।
मीठे-मीठे फल चुन-चुनकर,
सदा लगाते भोग जी।
छोटी-छोटी इनकी बस्ती,
बड़े मज़े का गाँव जी।।


- डॉ. प्रमोद सोनवानी
 
रचनाकार परिचय
डॉ. प्रमोद सोनवानी

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बाल-वाटिका (2)