प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
फरवरी 2018
अंक -43

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

ख़बरनामा

अखिल भारतीय ब्रजभाषा सम्मेलन एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी



20-21 दिसम्बर 2017 राजस्थान ब्रजभाषा अकादमी एवं कानोड़िया पी.जी.महिला महाविद्यालय, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में 'भक्तिकालीन ब्रजभाषा साहित्य में कला एवं संस्कृति: वर्तमानपरिप्रेक्ष्य' विषय पर दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में थे वरिष्ठ आई.ए.एस. व जाँच आयुक्त, सचिवालय, राजस्थान सरकार, जयपुर, अध्यक्ष के रूप में महाविद्यालय निदेशक डाॅ. रश्मि चतुर्वेदी तथा विशिष्ट अतिथि राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी की निदेशक डाॅ. अनीता नायर थीं। अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। राजस्थान ब्रजभाषा अकादमी के पूर्व सचिव व वरिष्ठ साहित्यकार श्री विट्ठल पारीक जी ने सुमधुर ब्रजभूमि वन्दना  'ब्रजवसुधामहतारी......।' प्रस्तुत की।

महाविद्यालय प्राचार्या डाॅ. मिनीटी.सी ने स्वागत वक्तव्य दिया। संगोष्ठी की आयोजन सचिव व हिन्दी विभाग की सहायक आचार्य डाॅ. शीताभ शर्मा ने संगोष्ठी के केन्द्रीय विषय पर विचार व्यक्त करते ब्रजभाषा माधुर्य, ब्रजभूमि व ब्रजवासियों की सांस्कृतिक विरासत के बारे में बताते हुए, छन्दों का सुमधुर गायन किया। जिनमें-

“ब्रज के परमस्नेहीलोग।
गारीदैं, हँसमिलतगहवरे,
अंतरप्रेमसंजोग।
नगरीदाससदाआनन्दी
सपनेहुनहींसोक
ब्रज के परमसनेहीलोग।“

मंचासीन सभी अतिथियों ने ब्रजभाषा साहित्य के समाज व मानवता को प्रदत्त योगदान व महत्व पर प्रकाश ड़ाला।


बनारसविश्वविद्यालय से पधारींहिन्दीविभाग की प्रोफेसरडाॅ. विद्योत्तमामिश्रानेअपनेबीजवक्तव्य मेंकेन्द्रीय विषय परविद्वतापूर्णवक्तव्य प्रस्तुतकरतेहुए भक्तिकालीनब्रजभाषा व साहित्य के विभिन्नपक्षोंपरविस्तारपूर्वकनवीनउद्भावनाएँ व्यक्त कीजिसकीउपस्थितसभीश्रोताओंनेभूरि-भूरिप्रशंसाकी।
दोदिसवीय संगोष्ठीमेंकुलपाँचचर्चा सत्र थेजिनमें 19विषय विशेषज्ञवक्ताओंनेसहभागिताप्रदानकी।कुल 65 शोध आलेख प्राप्तहुए।प्रत्येक सत्र में5 से 8 तकपत्र वाचनकिए गए,जिनमें से तीनश्रेष्ठपत्रवाचकोंकोश्रेष्ठ, श्रेष्ठतर व सराहनीय पुरस्कारप्रदानकिए गए।संगोष्ठीमेंदेश के विभिन्नविश्वविद्यालयों के विषय विशेषज्ञविद्वान व शोधार्थीसम्मिलितहुए,जिनमेंमुख्य रूप से बनारसविश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिमविश्वविद्यालय, कोटाविश्वविद्यालय, ब्रजविश्वविद्यालय, भरतपुर, राजस्थानविश्वविद्यालय, जयपुर, जयनारायण विश्वविद्यालय जोधपुर, एम.डी.एस. विश्वविद्यालय, अजमेर, आई.आई.एस. विश्वविद्यालय, जयपुर, केन्द्रीय विश्वविद्यालय, किशनगढ़, छत्तीसगढ़, जबलपुर, सिक्किम, शिलांग, बनस्थलीविद्यापीठ, मणिपालविश्वविद्यालय के साहित्य प्रेमियोंनेमुख्य रूप से सहभागिताप्रदानकी।
संगोष्ठी के समापन सत्र मेंभक्ति व समसामयिकविषय आद्धृत ब्रजभाषाकाव्यगोष्ठीकाआयोजनबड़ाहीमर्मस्पर्शीरहा।उपस्थितश्रोताओंमेंराधा-कृष्ण काभावसभीकोरोमहर्षितकरगया।उपस्थितकवियोंमेंश्रीविट्ठलपारीक (भरतपुर), श्रीभूपेन्द्रभरतपुरी, श्री श्यामसुन्दरअकिंचन (छाता मथुरा), डाॅ. ब्रजभूषणचतुर्वेदी (वृन्दावन), रचनागोस्वामी (आगरा), डाॅ. सुशीला ’शील’ (जयपुर), श्रीवरुणचतुर्वेदी (भरतपुर), श्रीराम खिलाड़ीस्वदेशी (मथुरा), डाॅ. रेखागुप्ता (जयपुर) ने मधुरगीतों व छन्दों की प्रस्तुति से सभीकोमंत्र मुग्ध करदिया।काव्य गोष्ठी की अध्यक्षतादेवस्थानविभाग के राज्यमंत्री कादर्जाप्राप्तश्री एस.डी. शर्माजी ने की।मंचसंचालनकविभूपेन्द्रभरतपुरी ने कियातथा धन्यवादज्ञापनडाॅ. रश्मिचतुर्वेदीजी ने दिया।
आयोजनप्रमुख डाॅ. रेखागुप्ता, आयोजनप्रभारीडाॅ. दीप्तिमा शुक्ला, सह-सचिवडाॅ. धर्मा यादव व डाॅ. सुनीता शेखावतथीं।


- डॉ. शीताभ शर्मा