प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
फरवरी 2018
अंक -38

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

जयतु संस्कृतम्
गीतम् 
 
सेल्फिकथा
 
प्रतिभान्ति समे मुदिता: हसिता:,
स्व-मुबाइलहस्तगता: भ्रमिता:। 
निजचित्रकलाकलने निरता:,
किमु वच्मि नु सेल्फिकथां वचसा?।।१
 
अतिविस्मितनेत्रकृता: बहुधा, 
लपितुं  चलितुं च सुयत्नपरा:।
इह सुंदरसेल्फिकृतेSपि रता,
शृणु रे कथयामि नु सेल्फिकथा: ।।२
 
क्वचनात्र विरुष्टमुखा: विकृता:, 
परिलक्षितसाहसकर्मपरा:।
अभिनाट्य मुखं विलसन्ति मुधा, 
शृणु रे कथयामीह सेल्फिकथा:।।३
 
चलचित्रगृहाग्रगता: सुजना:, 
अथवातुरिता: न्युपचारपरा:।
परमत्र सुचित्रजुषा: सकला:,
शृणु रे कथयामीह सेल्फिकथा:।।४
 
निजमित्रगणेन समं भ्रमिता:, 
प्रविकीर्णकचा: प्रमदा: लसिता:। 
नहि वेद्मि विलोक्य प्रदर्शनता:
शृणु रे कथयामीह सेल्फिकथा:।।५
 
मुखसंरचने विमनस्कतया,
मथितेव च घोरनिराशतया।
लघुका: पृथुला: बहुरूपधृता:,
शृणु रे कथयामीह सेल्फिकथा:।।६
 

- युवराज भट्टराई
 
रचनाकार परिचय
युवराज भट्टराई

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जयतु संस्कृतम् (3)