प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
जुलाई 2015
अंक -35

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

शोध प्रबन्ध अँखियाँ पानी पानी में प्रेम और दर्शन का लोकार्पण व अभिनन्दन समारोह
"अँखियाँ पानी पानी' हिन्दी साहित्य जगत में भक्ति की इकलौती कृति है।" ये शब्द थे पूर्व शिक्षा मंत्री एवं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर डॉ. नरेन्द्र कुमार सिंह गौर के। उन्होंने श्रीमती विजयलक्ष्मी विभा को अद्वितीय रचनाकार बताया और कहा कि उन्होंने अपनी लेखनी से समाज के हर वर्ग को राह दिखाने का प्रयास किया है। श्री गौर ने कहा कि साहित्य समाज का सही दर्पण है, जिसे उन्होंने सही स्वरूप में पेश किया है। वे 29 जून सोमवार को अखिल भारतीय महिला रचनाकार समिति के तत्वावधान में निराला सभागार में आयोजित एक भव्य समारोह में बोल रहे थे। कार्यक्रम का शुभारंभ महाकवि निराला के पौत्र श्री अखिलेश त्रिपाठी के द्वारा वाणी वंदना से हुआ। तत्पश्चात श्रीमती विजयलक्ष्मी विभा की कालजयी पुस्तक "अँखियाँ पानी पानी" एवं उस पर डॉ. पदमा सिंह के निर्देशन में सुश्री नलिनी शर्मा द्वारा किये गये शोध प्रबन्ध "अँखियाँ पानी पानी में प्रेम और दर्शन" का लोकार्पण हुआ।
 
लोकार्पण के पश्चात विभाजी का भव्य अभिनंदन एवं देश के विभिन्न अंचलों से आई हुईं महिला रचनाकारों जिनमें मंजुरानी (दिल्ली), रसवती खरे (बांदा), चकोरी खरे (शहडोल), कुमकुम शर्मा (संपादक उत्तर प्रदेश, लखनऊ), श्रीलता शालू  (कटनी) एवं डॉ. रमा सिंह (इलाहाबाद) का शाल ओढ़ाकर सम्मान किया गया।
सुश्री अँशुरूपा खरे ने 'अँखियाँ पानी पानी' की संगीतमयी प्रस्तुति से जनसमूह को मंत्र मुग्ध कर दिया तथा डॉ. शशि जौहरी, डॉ. मिथिलेश कुमारी शुक्ल एवं कविता उपाध्याय ने पुस्तक के ही भजन गाये।
 
डॉ. राजकुमार शर्मा ने विजयलक्ष्मी विभा की रचनाओं पर प्रकाश डालते हुये उन्हें "राष्ट्र भाषा गौरव" की संज्ञा दी और कहा कि विभा जी का साहित्य की हर विधा पर पूर्ण अधिकार है। उन्होंने 'अँखियाँ पानी पानी' जैसी महत्वपूर्ण कृति देकर साहित्य में एक नई भक्ति धारा प्रवाहित की है। उनकी रचनाओं में मीरा, महादेवी, सुभद्राकुमारी चौहान की काव्य-त्रिवेणी का पावन संगम स्थल है। उनकी रचनाओं की महान विद्वानों, समीक्षकों, संपादकों ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की है।
 
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग की पूर्व अध्यक्ष डॉ. राजलक्ष्मी वर्मा ने विभा जी के भजन संग्रह को अद्वितीय कृति बताया और अपने पिताश्री स्व. डॉ. रामकुमार वर्मा के सान्निध्य में बीते उन पलों की स्मृतियों को ताजा किया, जिनमें विभा जी उनके साथ होती थीं और कवि गोष्ठियों के दौर चला करते थे। 
वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार श्री जगदीश किंजल्क ने कहा कि विभाजी में काव्य सृजन की अनूठी प्रतिभा है। साहित्यकार मंजूरानी ने विभाजी के भजन संग्रह की भूरि-भूरि प्रशंसा की। डॉ. मिथिलेश कुमारी शुक्ला ने साहित्य क्षेत्र में विभाजी के योगदान की प्रशंसा करते हुये महिलाओं के आगे आने पर जोर दिया।
 
पूर्व प्राचार्य डॉ. सुरेन्द वर्मा ने 'अँखिया पानी पानी' की विस्तृत समीक्षा की और कहा कि इस पुस्तक की गुणवत्ता को वही समझेगा, जो इसमें डूब कर इसका अध्ययन करेगा। पूर्व प्रधानाचार्या डॉ. शारदा पाण्डेय ने कहा कि भक्ति साहित्य में हिन्दी की यह प्रथम कृति है। इसे महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाना चाहिये।
 
कार्यक्रम में विभा जी ने अपने लेखन से जुड़ी यादें ताजा की। अंत में एक कवि गोष्ठी हुई जिसमें तमाम कवि और कवयित्रियों ने काव्य पाठ कर वातावरण को सरसता प्रदान की। श्रीमती चकोरी खरे एवं रसवती खरे ने विभा जी के कृतित्व पर कविताएँ पढीं और श्रीमती कृष्णा साही ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम में, सौम्या मिश्रा, तान्या, अनमोल खरे, कार्तिक, अवि खरे विशेष सहयोगी रहे। कार्यक्रम की प्रचारमंत्री नीता मिश्रा, उमा सहाय, किरण जौहरी, अंजनी सिंह आदि उपस्थित रहे।
 
प्रस्तुति- जगदीश किंजल्क

- सुरेन बिश्नोई