प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
जनवरी 2018
अंक -37

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

ख़बरनामा

समकालीन ग़ज़ल संग्रह 'दसख़त' का लोकार्पण
 



9 दिसम्बर 2017, दिल्ली, गांधी शांति प्रतिष्ठान में अलवर के डॉ. जीवन सिंह द्वारा संपादित समकालीन हिंदी ग़ज़ल की किताब 'दसख़त' के लोकार्पण के अवसर पर अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए लब्धप्रतिष्ठ समालोचक प्रो. मैनेजर पाण्डेय ने कहा कि हिंदी ग़ज़ल अपने समय की चुनौतियों और सरोकारों को प्रभावी ढंग से व्यक्त कर रही है। जैसे बड़े कवियों की रचनाएँ, संकट काल में याद आती हैं, वैसे ही ग़ज़लों के शेर भी मुश्किल वक्त में याद आ जाते हैं और इस संग्रह में शामिल सभी कवियों की रचनाओं में यह सलाहियत मौजूद है।

मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए 'नया ज्ञानोदय' के सम्पादक लीलाधर मंडलोई ने हिंदी ग़ज़ल परम्परा का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंदी ग़ज़ल आज की व्यवस्था के प्रतिवाद के स्वर को सशक्त ढंग से उठा रही है। यह पुस्तक इसका प्रमाण भी है और पहचान भी।
बिहार (मुंगेर) से आये युवा ग़ज़लकार एवं आलोचक रामनारायण स्वामी ने कहा कि ग़ज़ल आज के समय और जीवन की जटिलताओं के प्रकटीकरण के साथ-साथ दिलों को जोड़ने का भी काम कर रही है, जिसकी आज बहुत ज़रूरत है।


इस विचार विमर्श सत्र में हस्तक्षेप करते हुए वरिष्ठ आलोचक व 'दसख़त' के संपादक डॉ. जीवन सिंह ने कहा कि इस संग्रह में शामिल कवियों में दुष्यंत कुमार और अदम गोंडवी की प्रगतिशील ग़ज़ल परम्परा का विकास दिखाई पड़ता है और इनसे हिंदी कविता का आयतन समृद्ध हुआ है। हिंदी कविता परम्परा में कही गई इन ग़ज़लों में हिन्दुस्तानियत भी है और अपनी सामासिक संस्कृति की अन्तर्समझ भी।

इससे पहले पुस्तक के लोकार्पण पर उपस्थित और इस संग्रह में शामिल कवियों रामकुमार कृषक, ज्ञानप्रकाश विवेक, देवेन्द्र आर्य, ओमप्रकाश यती और विनय मिश्र ने अपनी-अपनी चुनिंदा ग़ज़लों का पाठ किया।
इस अवसर पर दिल्ली और बाहर से पधारे विद्वानों में डॉ. जानकी प्रसाद शर्मा, डॉ. द्वारिका प्रसाद चारुमित्र, डॉ. आनंदक्रांति वर्द्धन, केवल गोस्वामी, हीरालाल नागर, कौशल कुमार, डॉ. प्रीति प्रकाश प्रजापति, मधुवेश, मदन विरक्त, शम्भु यादव, एम पी. कमल, डॉ. रमेश गौतम, कथाकार हरियश राय, हरिपाल त्यागी, एम. एल. गर्ग, डॉ. बली सिंह, मनोहर बाथम, डॉ.लवलेश दत्त, कृष्णा दामिनी, कनुप्रिया, नंदिता, बालकीर्ति, बबली बशिष्ठ आदि की गरिमापूर्ण उपस्थिति उल्लेखनीय रही।


कार्यक्रम का संचालन भार कथाकार महेश दर्पण और आभार प्रकटीकरण का कार्य यश पब्लिकेशन के शांति शर्मा ने किया।

'दसख़त' के लोकार्पण का यह कार्यक्रम 'अलाव' पत्रिका और यश पब्लिकेशन के सौजन्य से संपन्न हुआ।




(समाचार साभार: अलाव पत्रिका)


- के. पी. अनमोल
 
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के. पी. अनमोल

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