प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
जनवरी 2018
अंक -37

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

ग़ज़ल-गाँव

ग़ज़ल- 1

फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन
2122  1212  22


क़त्ल करता है मुस्कुराहट का
उफ़्फ़ क़यामत है दर्द का झटका

सब गुज़रते हैं मेरे सीने से
मैं हूँ इक पायदान चौखट का

बादलों से बचा लिया मैंने
चाँद लेकिन शजर में जा अटका

एक मुद्दत हुई ये दरवाज़ा
मुन्तज़िर है तुम्हारी आहट का

पास हैं हम कि दूर क्या समझें
फ़ासला है तो एक करवट का

जिस्म बिस्तर पे ही रहा शब भर
दिल न जाने कहाँ-कहाँ भटका


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ग़ज़ल- 2

फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन/फ़इलुन
2122  1212  22/112


वक़्त के साथ मैं चलूँ कि नहीं
सोचता हूँ वफ़ा करूँ कि नहीं

तुझसे मिलकर तेरा न हो जाऊँ
सो बता तुझसे मैं मिलूँ कि नहीं

वो मुसलसल सवाल करता है
उसको कोई जवाब दूँ कि नहीं

उसने मुड़-मुड़ के बारहा देखा
मैं उसे देखता भी हूँ कि नहीं

मेरे ही जिस्म तक न पहुँचा नूर
सोच में है दिया जलूँ कि नहीं

ये ख़ुशी है छुई-मुई जैसी
मश्विरा दो इसे छुऊँ कि नहीं

ऐ 'ज़िया' तू है जुस्तजू मेरी
मैं तेरा इन्तिज़ार हूँ कि नहीं


- सुभाष पाठक ज़िया
 
रचनाकार परिचय
सुभाष पाठक ज़िया

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ग़ज़ल-गाँव (3)