प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
दिसम्बर 2017
अंक -33

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

हाइकु

हाइकु 


कुछ न किया
पा लिया खुदा मैंने
बच्चे को देख।



साथ चले है
तेरी याद हमारे
हो साया जैसे।



कहीं न गया
तुझको याद किया
हो गई पूजा।



दिल समझे
नयन बोल रहे
प्यार महका।



फ़ैल रही है
शहरी आबो-हवा
खो रहे गाँव।



धर्म के लिए
लड़ रहे हैं लोग
धर्म कहाँ है?



गिरते मूल्य
खामोश है समाज
वजह क्या है?



बदलो सोच
पंक न देखकर
पंकज देखो।



भले न बने
धर्मस्थल तुझसे
पेड़ लगाना।



घर गमला
बातें बरगद सी
जँचती नहीं।


- दिलबाग विर्क
 
रचनाकार परिचय
दिलबाग विर्क

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