प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
नवम्बर 2017
अंक -35

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

आलेख

ताकि लगे न ठंड सलोनों को - घनश्याम बादल

जाड़े आ गए, भले ही अभी सर्दी का भीषण प्रकोप नहीं है पर यही मौसम बच्चों की ज़्यादा सार-सम्हाल का है और बच्चों को स्वस्थ रखना माँ-बाप के लिए बड़ा कठिन है। अब बच्चे तो बच्चे हैं, न तो वे गर्म कपड़े पहनने को तैयार होते हैं और न ही उन्हें सर्दी में बिना कपड़ों के छोड़ कर उनके बीमार होने का ख़तरा मोल लिया जा सकता है क्योंकि सर्दियां अक्सर बच्चों के मामले में ख़तरनाक सिद्ध हो जाती हैं। अब चूंकि छोटे बच्चे नाज़ुक होते हैं अतः वे सर्दी के प्रकोप को आसानी से सह नहीं पाते और ज़रा-सी ही लापरवाही से बीमार पड़ जाते हैं सो हर समझदार माँ-बाप का फ़र्ज़ बनता है कि वे अपने नन्हे मुन्नों का ख़ास तौर पर ध्यान रखें अन्यथा स्थिति में फिर उन्हें पूरी सर्दी ही परेशान रहना पड़ सकता है।

ज़रा-सी सावधानी ज़्यादा आराम-
वैसे थोड़ी-सी सावधानी रखने से नन्हे मुन्नों को आसानी से सर्दी की बीमारियों से बचाया जा सकता है। कुछ ऐसे टिप्स हैं, जिनका उपयोग करके अपने बच्चों को दादी, नानी तक सुरक्षित रखती आई हैं। बस, थोड़ा-सा ध्यान रखिये और निश्चिन्त हो जाइए, सर्दी आपके लाड़ले का कुछ भी नहीं बिगाड़ पाएगी।


स्वस्थ माँ, स्वस्थ बच्चा:
सबसे पहला मूलमंत्र है कि यदि बच्चा बहुत छोटा है व माँ का दूध पीता है तो सर्वप्रथम न केवल उसे अपितु खुद माँ को भी को सर्दी के प्रकोप से बचना ज़रुरी है। न केवल उसे ख़ुद को खुली ठण्ड में एक्सपोज करने बचना है वरन खाने-पीने में परहेज व संयम रखना होगा। कोई भी माँ कदापि नहीं चाहेगी कि उसके थोड़े-से खाने-पीने के शौक से उसका नौनिहाल बीमार पड़ जाए तो पहला सबक यही कि स्वयं पर नियंत्रण रखना है। बेहतर होगा कि माँ ख़ुद भी कोई एण्टी आॅक्सीडेंट लेती रहे। आंवला इस मौसम में अम्त फल कहा जा सकता है। उसका मुरब्बा, अचार, जूस अथवा कच्चा खाने से प्रतिरोधक ताकत बढ़ जाती है जो आपकी व बच्चे की ठण्ड से लड़ने में मदद करती है और सूत्र है माँ स्वस्थ तो बच्चा स्वस्थ।


कपड़ों का रखें पूरा ख्याल:
केवल खाने-पीने के परहेज से ही बात नहीं बनेगी क्योंकि माँ को ठण्ड लगने का दूसरा बड़ा कारण बनता है उसका अपना पहनावा। अतः हर उस माँ को, जो अपने बच्चे से प्यार करती है, आती हुई सर्दी में अपने भी पहनने-ओढ़ने का पूरा-पूरा ख़याल रखना लाजिमी है। अच्छा हो कि खास तौर पर छाती, सिर, पैर व पीठ को ठण्ड से बचाया जाए क्योंकि ठण्ड लगने के यही सबसे संवेदनशील अंग माने जाते हैं। हाँ, इसका मतलब ये नहीं कि माँ तो सर्दी से बचे पर बच्चे को खुला छोड़ दे। अपने से पहले अपने लाडले को ठण्ड से बचाना बेहद ज़रूरी है उसे आरामदायक व गर्म तथा पूरे शरीर को ढंकने वाले नर्म रेशों के वस्त्र अवश्य ही पहनाइए ताकि आपके लाडले की सर्दियां बिना कष्ट के कटें।


दें प्यार की गर्माहट:
अब बारी आती है बच्चे की सर्दी से रक्षा करने के लिए उसका ख़याल रखने की। तो ध्यान रखिए कि बच्चे ऊर्जा का बड़ा भण्डार होते हैं सो स्वाभाविक रूप से उन्हें ठण्ड का अहसास कम ही होता है। दूसरा सच ये भी है कि वे ही सबसे ज़्यादा कोमल भी होते हैं अतः ठण्ड सबसे आसानी से उन्हें ही अपना शिकार बनाती है तो भले ही वे कहते रहें कि उन्हे ठण्ड नहीं लग रही है पर आपको उन्हें प्यार से व समझा-बुझाकर गर्म कपड़े पहनाने ही हैं। इसके अलावा रात में बच्चे को अपने पास सटाकर सोना बहुत ही काम का है। आपके तन की गर्माहट उसे तंदुरुस्त रखने में काम आएगी यानी आपके प्यार की गर्माहट भी बचाएगी आपके राजकुमार को ठंड से।


समझाएं बच्चे को:
ख़ास तौर पर स्कूल जाने वाले बच्चे एक-दूसरे की देखा देखी, फैशन के कारण या कि अपने साथियों पर रौब मारने के चक्कर में कम से कम कपड़े पहनने का प्रयास करते हैं। पर, आपको उन्हें समझाना है कि ताज़ी-ताज़ी ठण्ड उन्हें बीमार करेगी तो वे न तो खेलने का मजा ले पाएंगे और न ही खाने का। अतः उचित मात्रा में कपड़े पहनना घाटे का सौदा कतई नहीं है। बच्चे ऐसे विचारों से प्रायः आसानी से सहमत हो जाते हैं।


खान-पान पर दें खास ध्यान:
खाने के मामले में भी सर्दियां बच्चों का खास ध्यान मांगती हैं। अच्छा हो कि प्रतिदिन हो सके तो उन्हें बादाम, आखरोट, काजू जैसे गर्म व पौष्टिक मेवे ज़रूर दें। ये एण्टीआॅक्सीडेंण्ट का काम भी करते हैं और सर्दी से बचाव भी करते हैं। यदि घर में अण्डे का उपयोग करते हैं तो प्रतिदिन एक अण्डा भी अच्छा है। आंवले दे सकें तो कहने ही क्या! छोटे बच्चों को घर में तैयार या फिर किसी अच्छी कम्पनी का च्यवनप्राश नियमित रूप से देने से भी उनकी सर्दी से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। अतः बेहतर होगा कि उन्हें हम च्यवनप्राश की एक या दो चम्मच रोज़ाना ज़रूर दें।


रामबाण दादी के नुस्खे:
बच्चों की सर्दी से सुरक्षा में दादी, नानी के नुस्खे रामबाण सिद्ध होते हैं अतः जब उन्हें सर्दी लग जाए या लगने की आशंका हो तब दादी माँ या नानी माँ के अनुभवों का बेहिचक फायदा उठाने ना भूलें। मत सोचिए कि उनके अनुभव बस यूँ ही हेैं। सर्दी से उल्टी लगने पर उनका सुझाया गया प्याज का रस या फिर पान के पत्ते का काढ़ा किसी भी एलोपैथिक नुस्खे से ज़्यादा कारगर तो है ही उसके साइड इफैक्ट भी नहीं हैं। पेट में दर्द होने पर मैथी के दाने या अजवायन का मुकाबला आज भी कहाँ है?


जाएँ डाॅक्टर के पास:
पर हाँ, ये भी याद रखिये कि ये नुस्खे महज़ शुरुआती स्थिति में ही आजमाने चाहिए ज़रा भी हालत ख़राब लगे तो बिना देर किये डाॅक्टर के पास जाने में ही भलाई है नहीं तो ख़ास तौर पर छोटे बच्चों को न्युमोनिया भी हो सकता है, जो जानलेवा भी हो सकता है और लम्बे समय तक आपको व बच्चे को परेशान भी करेगा तथा उसकी तंदुरुस्ती भी ख़राब बनी रहेगी।


आॅल द बेस्ट:
बहुत ज़्यादा चिंता न करके बस थोड़ा-सा ख्याल रखेंगी तो बच्चा स्वस्थ रहेगा और आपकी सर्दियां अच्छे से कट ही जाएँगी। बेस्ट आॅफ लक फोर दिस विण्टर सीज़न! कीप हैल्दी एंड फिट विद योअर चाइल्ड!!


- घनश्याम बादल
 
रचनाकार परिचय
घनश्याम बादल

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