प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
नवम्बर 2017
अंक -50

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

ग़ज़ल-गाँव

बाल ग़ज़ल-

अरे बच्चों चलो देखें, नया सर्कस जो आया है
तमाशों का पिटारा इक वो अपने संग लाया है

लिये ढोलक चले ठुम-ठुम बँदरिया झूमती-गाती
चलाता साइकिल भालू सभी के मन को भाया है

सलामी दे रहा हाथी, तो तोता दागता तोपें
किसी दमदार ने बाइक को रॉकिट-सा उड़ाया है

गुज़र जाती मज़े से आग के छल्लों से इक लड़की
बड़ी हिम्मत भरी उसमें, उसे डर छू न पाया है

करामातें दिखाते गेंद से जोकर रँगीले नौ
चलाना बाघ को रिक्शा भला किसने सिखाया है

लगा मौका मज़े ले लो, सुनाना स्कूल में किस्से
कि कैसे शेर ने करतब दिखा सबको हँसाया है


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बाल ग़ज़ल-

तितली से बतियाता फूल
हँसता और हँसाता फूल

भर सबके जीवन में रंग
झूम-झूमकर गाता फूल

आओ बच्चों मेरे पास
कहता है मुस्काता फूल

सर्दी, गर्मी या बरसात
इक-सा सदा लुभाता फूल

माँगे हमसे केवल प्यार
मिट्टी, पानी खाता फूल


- कुमार गौरव अजीतेन्दु
 
रचनाकार परिचय
कुमार गौरव अजीतेन्दु

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ग़ज़ल-गाँव (1)