प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
नवम्बर 2017
अंक -37

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

जो दिल कहे!

नेहरु: स्वाधीनता-संग्राम के सर्वाधिक विवादास्पद नायक !

 

व्यक्तित्व मूल्यांकन का आधार नैतिकता नहीं, नजरिया होना चाहिए। व्यक्ति के नजरिया और निजी जीवन शैली को जोड़कर देखना चाहिए। नेहरु की आलोचना का कोई मुद्दा नहीं मिलता तो हम उनके निजी जीवन के मसलों पर हमले आरंभ कर देते हैं। हमारे यहाँ सोशल मीडिया से लेकर तमाम किस्म के किताबी संस्मरणों तक नेहरु जी की निजी जिंदगी के पहलुओं के विकृतिकरण की खूब कोशिशें होती रही हैं। नेहरु जैसे बड़े व्यक्तित्व को देखने समझने के लिए अभी हमारे देश में खुलकर विमर्श करने की आवश्यकता है।

 

भारत की आत्मा को समझने में पंडित जवाहरलाल नेहरू से बढ़कर और कोई बुद्धिजीवी हमारी मदद नहीं कर सकता है। स्वतंत्रता संग्राम के समय उन्होंने जेल में रहकर अनेक पुस्तको की रचनाएँ की। ‘मेरी कहानी, विश्व इतिहास की झलक, भारत की खोज’ उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ थी। नेहरु जी की भारत को लेकर जो समझ रही है, वह अद्भुत है। वे भारतीय समाज, धर्म, संस्कृति, इतिहास आदि को जिस नजरिए से व्यापक दृष्टिकोण पर रखकर देखते हैं वह विरल चीज है।

 

नेहरू जी का मानना था कि "हिंदुस्तान को बहुत हद तक बीते हुए जमाने से नाता तोडना होगा और वर्तमान पर जो उसका आधिपत्य है उसे रोकना होगा। इस गुजरे जमाने के बेजान बोझ से हमारी जिंदगी दबी हुई है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि गुजरे जमाने की उन चीजों से हम नाता तोड़ दें या उनको भूल जाएं, जो जिंदगी देनेवाली हैं और जिनकी अहमियत है। अंध भक्ति बुरी होती है और इसके ऊपर भविष्य की बुनियाद नहीं रखी जा सकती।"

 

नेहरु जी ने लिखा, दैवी शक्तियों में जरूरत से ज्यादा भरोसा करने से आत्म-विश्वास घट जाता है और सृजनात्मक योग्यता एवं सामर्थ्य घटने लगता है। भारत में जिंदगी सस्ती और खोखली एवं भद्दी है, उसमे पैबंद लगे हुए हैं और गरीबी का दर्दनाक खोल उसके चारों तरफ है। भारत का वातावरण बहुत कमजोर बनाने  वाला हो गया है। उसकी वजहें कुछ बाहर से लादी हुई हैं, और कुछ अंदरूनी हैं, लेकिन वे सब बुनियादी तौर पर गरीबी का नतीजा हैं। हमारे यहां के रहन-सहन का दर्जा बहुत नीचा है और हमारे यहां मौत की रफ्तार बहुत तेज है। भारत में जहां गरीबी सबसे बड़ी चुनौती है वहीं दूसरी ओर धर्म और धार्मिक चेतना सबसे बड़ी चुनौती है।

 

नेहरु के व्यक्तित्व और आचरण से हम आधुनिक मूल्यों और मानवतावादी नजरिए को लेकर बहुत कुछ सीख सकते हैं। नेहरु को महान जिस चीज ने बनाया वह था जीवन के प्रति उनका विवेकवादी नजरिया। नेहरु के लिए साधन और साध्य एक थे। पहली चीज जिसे नेहरु मूल्यवान मानते हैं वह है इन्सानी रिश्ता। उनका मानना था कि इन दिनों यह एहसास कम हो गया है। वह चाहते थे कि हम मानव-सभ्यता की अब तक की सभी महान उपलब्धियों को आत्मसात करके विकास करें।

 

नेहरु जी का समूचा व्यक्तित्व आधुनिक था। आधुनिक होने के लिए आधुनिक नजरिए का होना बेहद जरुरी है। नेहरु इस अर्थ में आधुनिक थे कि उनके पास आलोचनात्मक विवेक था, विज्ञान और न्याय की कसौटी या वैज्ञानिक कसौटी पर चीजों, वस्तुओं, विचारों और व्यक्तियों के आचरण को वे परख कर देखते थे। उन्होंने स्वयं को वैज्ञानिक कसौटी पर खरा उतारने की भरसक कोशिश की।

 

नेहरु के निजी पहलुओं को नेहरु के नजरिए के साथ जोड़कर देखा जाना चाहिए। मुश्किल यह है कि नेहरु पर हमले करने वाले, पहलु नेहरु का चुनते हैं, और नजरिया अपना जोड़ देते हैं, और इस तरह वे नेहरु की 'कलंकगाथा' निर्मित करते हैं। नेहरु के व्यक्तित्व और आचरण से हम आधुनिक मूल्यों और मानवतावादी नजरिए को लेकर बहुत कुछ सीख सकते हैं।

 


- नीरज कृष्ण