हस्ताक्षर रचना
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
अक्तूबर 2017
अंक -41

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

लेख

जायसी का पद्मावत और भंसाली की पद्मावती वाया मिथक, कल्पना और भंसाली-तेजस पूनिया


बाजीराव मस्तानी फ़िल्म से सबको रोमांचित तथा उद्भूत कर देने वाले सञ्जय लीला भंसाली, दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह इस बार लेकर आ रहे हैं पद्मावती। एक रानी थी चित्तौड़ की पद्मिनी, जिसे पद्मावती के नाम से भी जाना जाता है। इतिहासकारों की माने तो माना जाता है कि यह 13 वीं-14 वीं सदी की महान भारतीय रानी है। यद्यपि इसका कोई ऐतिहासिक सबूत नहीं मिलता है कि रानी पद्मिनी इतिहास के अस्तित्व में थी भी या नहीं। इसी कारण अधिकांश आधुनिक इतिहासकारों ने 13 वीं सदी की रानी पद्मावती के अस्तित्व को खारिज किया है। हालांकि रानी पद्मिनी के साहस और बलिदान की गौरवगाथा इतिहास में अमर है।
सिंहल द्वीप के राजा गंधर्व सेन और रानी चंपावती की बेटी पद्मिनी चित्तौड़ के राजा रतनसिंह के साथ ब्याही गई थी। कहा जाता है कि रानी पद्मिनी बहुत खूबसूरत थी और उनकी खूबसूरती पर चित्तौड़ को लूटने वाले दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी की बुरी नजर पड़ गई और अलाउद्दीन किसी भी कीमत पर रानी पद्मिनी को हासिल करना चाहता था, इसलिए उसने चित्तौड़ पर हमला कर दिया। अपनी आन-बान और शान को बचाने के लिए रानी पद्मिनी ने आग में कूदकर जौहर किया लेकिन अपने अस्तित्व पर आँच नहीं आने दी। हालांकि इस कथा को हिंदी साहित्य के महान कवियों में शुमार कवि मलिक मुहम्मद जायसी ने अवधी भाषा में पद्मावत ग्रंथ रूप में लिखा था। फ़िल्म के रिलीज होने से पूर्व जो विवाद उत्पन्न हुआ है उसका कारण भी यही है कि लोगों को कहानी और फ़िल्म में अंतर नहीं समझ आ पाया। वस्तुतः फिल्मकारों पर भी यह आरोप समय समय पर लगते रहे हैं कि उन्होंने इतिहास, मिथक और कल्पना जगत में विचरती कहानियों को तोड़ मरोड़ कर जनता के समक्ष फ़िल्म के रूप में पेश किया है।


सञ्जय लीला भंसाली द्वारा लिखित, निर्देशित तथा निर्मित इस फ़िल्म में मुख्य किरदारों में दीपिका पादुकोण, शाहिद कपूर, रणवीर सिंह तथा रजा मुराद हैं। फ़िल्म 1 दिसम्बर को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी। फ़िल्म में दीपिका पादुकोण- रानी पद्मिनी, शाहिद कपूर- रावल रतन सिंह,रणवीर सिंह- अलाउद्दीन खिलजी,अदिति राव हैदरी- कमला देवी के रुप में नज़र आएंगे। इसके अलावा ऐश्वर्या राय बच्चन और सोनू सूद भी फ़िल्म में अभिनय करते नजर आएंगे। फिल्म की शूटिंग के दौरान श्री राजपूत करणी सेना के कुछ सदस्यों ने फिल्म का विरोध किया और जयगढ़ दुर्ग में फिल्म के सेट पर तोड़फोड़ की। उन्होंने आरोप लगाया की फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की गयी है। कुछ समय बाद फिल्म के निर्माताओं ने यह आश्वासन दिलाया की फिल्म में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है। किन्तु  इन सदस्यों ने फिर से चित्तौड़गढ़ किला का भंडाफोड़ किया और रानी पद्मिनी के महल में स्थापित दर्पण को तोड़ दिया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारियों के मुताबिक, इन दर्पणों को लगभग 40 साल पहले चित्तौड़गढ़ किले में रखा गया था। इसके अलावा कोल्हापुर में भी इस फिल्म के सेट पर आग लगा दी गई थी, जिससे उत्पादन सेट, वेशभूषा और गहने जल गए। जिसके कारण फिल्म का उत्पादन बजट 160 करोड़ से बढ़कर 200 करोड़ हो गया है और अब इसके सबसे महंगी बॉलीवुड फिल्म होने की उम्मीद की जा रही है। फिल्म के गानों के संगीतकार संजय लीला भंसाली हैं। गायिका श्रेया घोषाल फ़िल्म के लिए पहले से ही एक गाना रिकॉर्ड कर चुकीं हैं। दीपिका पादुकोण फ़िल्म में पारम्परिक राजस्थानी लोकनृत्य घूमर करती हुईं दिखाई गई हैं। श्रेया घोषाल के अनुसार, "फ़िल्म में बहुत ही खूबसूरत गानें हैं। फ़िल्म में लोक संगीत और प्रभावशाली वाद्य यंत्रों का संयोजन भी अद्भुत है।”
खबरों की माने तो 'पद्मावती' रणवीर की पहली ऐसी फिल्म हैं, जिसमें वे विलेन के तौर पर नजर आएंगे। कैरेक्टर के मुताबिक रणवीर इस लुक में बेहद खौफनाक रूप में नजर आ रहे हैं। उनकी सिर्फ दाढ़ी ही नहीं, बाल भी काफी बढ़े हुए हैं। चेहरे पर एक बड़ा-सा चोट का निशान है। कहना पड़ेगा कि उनका यह लुक खौफनाक होने के साथ-साथ काफी इम्प्रेसिव भी है।

रणवीर उन एक्टर्स में शामिल हैं जो सिर्फ एक्टिंग करने के लिए ही नहीं जाने जाते अपितु अपने किरदार के हिसाब से ढल जाने के लिए भी जाने जाते हैं।  इस फिल्म में उनके किरदार की बात करें तो सुनने में तो यहाँ तक आ रहा है कि खिलजी के नेगेटिव शेड में रणवीर ने खुद को इस कदर ढाल लिया कि उनका अपने दोस्तों से बात करने का तरीका भी इस कैरेक्टर जैसा ही हो गया। इसकी वजह से अब वह खिलजी के प्रभाव से बाहर निकलने के लिए साइकेट्रिस्ट की मदद ले रहे हैं।

कुल मिलाकर संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती इस साल की अंतिम ऐसी फ़िल्म है, जिसका बहुत से लोगों को बेसब्री से इंतजार है। इस फिल्म के रिलीज होने से एक बात तो कम से कम तय है कि उनका यह लुक फैंस को फिल्म के लिए एक्साइडिट कर देगा। काजल लगी हुई उनकी आँखें काफी डरावनी लग रही हैं, जो किसी के लिए भी बुरे सपने से कम नहीं है। इस किरदार में रणवीर सिंह एक खलनायक के रूप में, बुराई और कामुकता के प्रतीक के साथ ही अंहकार में भी चूर नजर आ रहे हैं साथ ही उनके बालों को एक यूनिक स्टाइल भी दिया गया है।
रणवीर सिंह ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी की भूमिका के बारे लिखा कि ख़िलजी के इस रूप में देखकर आपको यकीन हो जाएगा कि वो अपने किरदार में उतरने के लिए कितनी मेहनत करते हैं। क्योंकि अलाउद्दीन खिलजी को स्क्रीन पर उतारना कोई आसान बात नहीं है। उनकी आँखें ही दुश्मन को डराने के लिए काफी लग रही हैं। यह अवतार उनका अब तक का सबसे डरावना है लेकिन इससे फिल्म के प्रति उत्सुकता और बढ़ गई है। ऐसा माना जा रहा है कि भंसाली की यह फिल्म दर्शकों पर बाजीराव मस्तानी वाला जादू बिखेरने में कामयाब हो जाएगी। निर्माताओं ने सबसे पहले दीपिका पादुकोण के लुक को जारी किया था। उसके बाद शाहिद का लुक सामने आया। दोनों ही लुक को फैंस के साथ ही फिल्म इंडस्ट्री के लोगों ने काफी पसंद किया था। मलिक मोहम्मद जायसी के महाकाव्य ‘पद्मावत’ की कुछ पंक्तियाँ जिसमें रानी पद्मिनी के विषय में उन्होंने बताया था। इसमें कवि ने उनकी सुन्दरता को बहुत अच्छे ढंग से प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार पद्मावती के पास सुंदर तन था, अगर वे पानी भी पीती तो उनके गले के अंदर से पानी देखा जा सकता, अगर वे पान खाती तो पान का लाल रंग उनके गले में नजर आता।


तन चितउर, मन राजा कीन्हा। हिय सिंघल, बुधि पदमिनि चीन्हा॥
गुरू सुआ जेइ पंथ देखावा। बिनु गुरु जगत को निरगुन पावा?॥
नागमती यह दुनिया-धंधा। बाँचा सोइ न एहि चित बंधा॥
 राघव दूत सोई सैतानू। माया अलाउदीन सुलतानू॥
प्रेम-कथा एहि भाँति बिचारहु। बूझि लेहु जौ बूझै पारहु॥


इस कविता के अनुसार रानी पद्मिनी/ पद्मावती चितौड़ के राजा राणा रतन सिंह की पत्नी थी और समकालीन सिंहली (श्रीलंका का एक द्वीप) राजा की बेटी थी।
हिंदी साहित्य के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यकार रामचंद्र शुक्ल ने अपनी किताब ‘हिंदी साहित्य का इतिहास’ में ‘रानी पद्मावती’ का जिक्र किया है। आचार्य शुक्ल लिखते हैं, जायसी की अक्षय कीर्ति का आधार ‘पद्मावत’ है। उन्होंने तीन पुस्तकें लिखीं - पद्मावत, अखरावट, आखिरी कलाम। जायसी अपने समय के सिद्ध फकीरों में माने जाते हैं। अमेठी राजघराने में इनका बहुत मान था। कबीर ने अपनी झाड़-फटकार से हिंदू-मुसलमान के कट्टरपन को दूर करने का प्रयास किया। लेकिन जायसी ने हिंदु और मुसलमान के दिलों को आमने-सामने करके अजनबीपन मिटाने का काम किया। पद्मावत कहानी में इतिहास और कल्पना का योग है। इस कहानी का पूर्वार्ध (शुरुआत) पूर्ण तरह से कल्पित है लेकिन उत्तरार्ध (अंत) ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है।


द हिंदू की एक खबर के मुताबिक, कई इतिहासकारों की इस मुद्दे पर एक राय है कि रानी पद्मावती एक काल्पनिक किरदार है। जबकि इतिहास की किताबों में झांकें तो पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी के बीच प्रेम एक कहानी के रूप में दिखता है और लोगों का मानना है कि इतिहास के साथ छेड़छाड़ की गई है और रानी पद्मावती एक राजपूत वीरांगना थीं और उन्होंने आन-बान-शान के लिए हंसते-हंसते जौहर कर लिया।
दूसरी ओर सरकारी आंकड़ों की माने तो राजस्थान सरकार की पर्यटन वेबसाइट के मुताबिक, अलाउद्दीन खिलजी के चित्तौड़ की रानी पद्मावती के प्यार में पड़ने की कहानी कोई कल्पना नहीं इतिहास है। सरकारी वेबसाइट में अलाउद्दीन के चित्तौड़ की रानी के प्रेम में पड़ने के बाद आक्रमण के समय को 13वीं सदी बताया गया है।


इतिहासकार हैदर के अनुसार- साहित्यिक चीज़ें ज़्यादा लोकप्रिय होती हैं। गंभीर ऐतिहासिक वाकियों उनकी व्याख्या आसानी से जनमानस में नहीं जगह बना पाते हैं। ऐसी प्रवृत्ति हर जगह है और यह हमारे देश में भी है। जो ज़्यादा दिलचस्प है वो ज़्यादा लोकप्रिय होगी और जिन वाकियों से दिलचस्पी पैदा नहीं होती है वे लोकप्रियता हासिल नहीं कर पातीं।
पद्मावती के लोकप्रिय होने की वजह यह है कि स्थानीय राजपूत पंरपरा के तहत चारणों ने इस किरदार का खूब बखान किया। इस वजह से भी यह कथा काफ़ी लोकप्रिय हुई। पद्मावती हमारी वाचिक परंपरा की उपज है और इसका प्रभाव किताबों से कहीं ज़्यादा होता है। इसकी काफी गहरी पैठ होती है। हमें इससे कोई समस्या भी नहीं है।


कुल मिलाकर यह तो 1 दिसम्बर को ही ज्ञात हो पायेगा कि संजय लीला भंसाली की यह ड्रीम प्रोजेक्ट फिल्म 'पद्मावती' दर्शकों पर कितना प्रभाव डाल पाएगी। इसके अलावा यह भी देखना होगा कि क्या वाकई जिस पद्मावती की खूबसूरती तथा बहादुरी के चर्चे इतिहास में या मिथकों में या लोगों की कहानियों में श्रुति परम्परा के रूप में बने हुए हैं उनके साथ भंसाली ने वाकई कोई छेड़छाड़ की है या नहीं और एक अंतिम बात यह भी रोचक होगी कि क्या फिर से यह फिल्म उन्हीं विवादों के साथ एक बार पुन: तोड़फोड़ तथा हंगामा की शिकार होगी या नहीं?


- तेजस पूनिया