प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
सितंबर 2017
अंक -31

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

आलेख

हिन्दी साहित्य की वेब पत्रिकाएँ: एक परिचय- अजीत कुमार सिंह


इन्टरनेट, कम्प्यूटर और स्मार्टफोन के सहयोग से आज हम लोगों के मध्य एक तीसरी दुनिया है जिसे सभी ‘वर्चुअल’ (आभासी) दुनिया के नाम से पुकारते है। इस दुनिया का निर्माण वैज्ञानिकों, शोधार्थियों तथा कर्मचारियों के लाखों-करोड़ों प्रयोग के द्वारा असंख्य कलपुर्जों के उपयोग से बना है। इस दुनिया में जाने के लिए ना तो हमें पासपोर्ट की आवश्यकता है और ना ही वीजा की। कम्प्यूटर, स्मार्टफोन और इन्टरनेट के पारस्परिक सहयोग से आप इसमें दाखिल हो सकते है और जब तक मन करे तब तक रुक सकते हैं। वर्चुअल दुनिया दिनोंदिन अपने आधार को मजूबत कर रही है । हकीकत की दुनिया के ना जाने कितने काम इस दुनिया से हो रहे हैं शायद यही इसकी मजबूती और सफलता का कारण है। आज इसका उपयोग विश्व के समस्त देशों में हो रहा है। विश्व के लोगों को एक ऐसा पटल मिला जहाँ पर खड़े होकर वह अपनी बात पूरी दुनिया तक पहुँचा सकते हैं।

इंटरनेट की तमाम खूबियों में से एक खूबी है ‘संचार’। इसी खूबी के कारण लोग एक दूसरे से संवाद स्थापित करने लगें किन्तु विश्व भर में फैले भारतीयों को वहाँ भी समस्या आयी जो अपनी ही बात को अपने लोगों तक पहुँचा पाने में असमर्थ थे। इसका प्रमुख कारण कम्प्यूटर और इन्टरनेट का जन्म अंग्रेजियत की गोद में होने के कारण हुआ, सो उसकी मातृभाषा अंग्रेजी थी ऐसे में हिन्दी में संवाद और संचार दूर की कौड़ी थी । हिन्दी के विकास हेतु नयें-नयें टूल्स और फाण्टों का निर्माण होने लगा। हिन्दी में कई प्रकार के फाण्ट बनाए गए किन्तु फाण्टों की विविधिता के कारण हिन्दी का पूर्ण रूप से संचार नही हो पा रहा था। कुछ हिन्दी प्रेमियों ने हिन्दी को प्रदर्शित और इन्टरनेट की मुख्यधारा में लाने के लिए बेचैन थे उन्होंने एक नई तकनीक अपनाई ताकि उनका लिखा हुआ सभी हिन्दी नेटिजनों तक पहुँचें, ऐसे में उन्होंने विभिन्न उपकरणों (टूल्स) के सहयोग हिन्दी लिखते फिर उसको JPG (फोटो) फार्मेट बनाते और उसके बाद उसे इन्टरनेट पर लगाते जबकि दूसरी तरफ अंग्रेजी बिना किसी झमेले के इन्टरनेट पर आसानी से टाइप होकर प्रदर्शित हो जाती थी।

इन्टरनेट पर देवनागरी लिपि के विकास की भी अपनी कहानी है। हिन्दी प्रेमियों की इसको लेकर अपनी तड़प और विकास को लेकर अपनी गाथाएँ है। 90 दशक के मध्य में जब भारत में इन्टरनेट जनता के खोला गया तब तक विश्व के विकसित देशों में इसने अपना स्थान बना लिया था किन्तु हिन्दी का कोई अता-पता नही था अगर था तो वह JPG(फोटो) फार्मेट में या रोमन लिपि में या उन फाण्टों में जो सभी के पास उपलब्ध नही थे। इसी दौर में भारत से पहला अंग्रेजी समाचार पत्र ‘द हिन्दू’ इन्टरनेट पर आया, इसके आते ही भारत के हिन्दी समाचार पत्र के चैनलों में इन्टरनेट पर आने की होड़ लग गई। समय के साथ दैनिक जागरण, दैनिक हिन्दुस्तान,अमर उजाला आदि ने अपना-अपना स्थान बना लिया किन्तु सभी के अपने-अपने फाण्ट होने के कारण किसी में एकरूपता नही थी। शायद इसी लिए हिन्दी को वह गति नही मिल सकी जो अंग्रेजी को मिली।

इन्टरनेट पर हिन्दी फाण्टों और टूल्सों का सीमित दायरा था इन सब के बाद भी दिसम्बर 1996-जनवरी 1997 में रोहित कुमार ‘हैप्पी’ ने न्यूजीलैण्ड से अपनी पत्रिका ‘भारतदर्शन’ को ऑनलाइन कर दिया। यह हिन्दी साहित्य की प्रथम वेब पत्रिका थी जो भारत से दूर न्यूजीलैण्ड से निकली थी। हरियाणा से सम्बन्ध रखने वाले रोहित कुमार ‘हैप्पी’ ने इन्टरनेट जगत में हिन्दी साहित्य की वेब पत्रिका के झण्डाबदार बने। इनके बाद भारत से 22 सितम्बर 1999 को ‘वेबदुनिया’ नामक वेब पोर्टल आता है। यह वेब पोर्टल हिन्दी सहित आठ अन्य भारतीय भाषा में निकला। इसके बाद शारजाह से पूर्णिमा वर्मन की ‘अभिव्यक्ति’ और ‘अनुभूति’ नामक वेब पत्रिका आयीं, जिनमें से एक ‘गद्य’ को और दूसरी ‘पद्य’ को समर्पित थी।

यह वही समय था जब हिन्दी अपने अस्तित्व को स्थापित कर रही थी दूसरी ओर लोग, संस्थाएँ तथा देश अपने-अपने माध्यम से फाण्टों की विभिन्नता के बावजूद देवनागरी में लिखने का प्रयास कर रहे थे। 2003 के इसी दौर में आलोक कुमार ने ‘नौ दो ग्यारह’ नाम से हिन्दी का पहला ब्लॉग बनाया । इस ब्लॉग के बनने से पहले अखबारों के पोर्टलों एवं वेब पत्रिकाओं ने हिन्दी में ‘न्यू मीडिया’ की उपस्थिति ने दस्तक दे दी।   इसी न्यू मीडिया को ई-पत्रकारिता, साइबर पत्रकारिता, वेब पत्रकारिता आदि विभिन्न नामों से जाना जाने लगा। लगभग इसी समय ‘यूनीकोड फाण्ट’ आता है जो इन्टरनेट पर देवनागरी सहित विश्व की तमाम भाषाओं को एकरूपता प्रदान करता है।  
यूनिकोड के आ जाने से हिन्दी वेब पत्रकारिता को एक नई दिशा मिली और इन्टरनेट जगत में हिन्दी का विस्तार होने लगा। आज इन्टरनेट पर हिन्दी के हजारों वेब पोर्टल्स एवं वेब साइट्स हैं। इन वेब पोर्टलों एवं वेब साइटों में शिक्षा, चिकित्सा, व्यवसाय, सोशल नेटवर्क, पत्रकारिता तथा राजव्यवस्था आदि की हैं। हमारा ध्येय उन पत्रिकाओं तक पहुँचने का है जो हिन्दी साहित्य को समर्पित है तथा दैनिक, साप्ताहिक, मासिक, अर्द्ध वार्षिक रूप से इन्टरनेट के माध्यम से प्रकाशित होती हैं। ऐसी पत्रिकाएं आज भारत सहित विश्व के कई देशों से निकल रही हैं । हमारी कोशिश रहेगी कि हम उन पत्रिकाओं तक पहुँचे जो हिन्दी के लिए अपनी उत्कृष्ठ सेवा अपने पाठकों तक पहुँचा कर हिन्दी साहित्य का विस्तार कर रहे हैं।


भारत से प्रकाशित हिन्दी साहित्य की वेब पत्रिकाएँ

वेब दुनिया  http://www.webdunia.com
15 अगस्त 1995 का दिन भारत के लिए सूचना प्रोद्योगिकी के संदर्भ में किसी त्योहार से कम नही था क्योंकि इसी दिन भारत में इन्टरनेट जनता के लिए खोला गया था। इन्टरनेट आने के लगभग चार वर्ष बाद “22 सितम्बर 1999 को जन-जन के लिए सूचना प्रोद्योगिकी के घोष के साथ विश्व के पहले हिन्दी वेब पोर्टल के रूप में ‘वेब दुनिया’ का जन्म हुआ जिसमें भारत के हिन्दी मानस के लिए समाचार सहित विविध विषयों पर हिन्दी में स्तरीय सामग्री उपलब्ध कराने के अभियान की शुरूआत हुई।”  यह वेब पोर्टल इस लिए भी महत्वपूर्ण है कि जिस समय इन्टरनेट पर हिन्दी के क्षेत्र में पोर्टल की संभावनाएं न के बराबर थी उस समय वेब दुनिया ने भारतीय भाषाओं को वेब पर लाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुई । आज इस पोर्टल पर पैंतीस (35) से अधिक चैनल उपलब्ध है। जिसके द्वारा हिन्दी पाठकों की आवश्वयकता की हर सामग्री प्रस्तुत की जाती है। यह पोर्टल सात भारतीय भाषाओं में काम करता है।

आज यह पोर्टल मूलतः समाचार के रूप में काम कर रहा है किन्तु जिस प्रकार समाचार के अंगों में व्यापार, चिकित्सा, ज्योतिष, मनोरंजन तथा खेल की खबरें होती है ठीक ऐसे ही इस पोर्टल पर हिन्दी साहित्य की उपस्थिति है।


रचनाकार http://www.rachanakar.com
इस पत्रिका के सम्पादक रविशंकर श्रीवास्तव ‘रतलामी’ है। यह पत्रिका आज हजारों-लाखों लोगों द्वारा पढ़ी जा रही है। इस पत्रिका की बढ़ती लोकप्रियता के चलते इसने अपना मोबाइल अनुप्रयोग भी जारी कर दिया है। एक समय था जब यह ब्लॉग के रूप में निकलती थी किन्तु सम्पादक की अथक मेहनत और कर्मठता ने इसे वेब पत्रिकाओं के शीर्ष पर पहुँचा दिया है। आज इस पत्रिका पर हिन्दी की विभिन्न विधाओं का विपुल साहित्य उपलब्ध है। जो इस प्रकार है- कविता (2534), गज़लें (451), लघुकथा (570) व्यंग्य (1702) बालकथा (302) आदि है। इस पत्रिका का प्रकाशन 2005 से हो रहा है। इस पत्रिका के प्रमुख भाग है – मुख्यपृष्ठ, कहानी, उपन्यास, लघुकथा, कविता, आलेख तथा व्यंग्य आदि है। आज यह पत्रिका हिन्दी की विभिन्न विधाओं में काम कर रही है। साइबर संसार में हिन्दी साहित्य  की यह पत्रिका एक नया कीर्तिमान स्थापित करने की ओर बढ़ रही है।

हिन्दी समय http://www.hindisamay.com
यह पत्रिका महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा द्वारा प्रकाशित होती है । इसके वर्तमान संपादक प्रो. आनंद वर्धन शर्मा है। इस पत्रिका का “एकमात्र उद्देश्य दुनिया भर में फैले व्यापक हिन्दी पाठक समुदाय तक हिन्दी की  श्रेष्ठ रचनाओं की पहुँच आसानी से संभव बनाना है।”  इस वेब पत्रिका में विधाओं के सापेक्ष 27 स्तम्भ बनाए गए है। जिनमें से प्रमुख स्तम्भ – उपन्यास, कहानी, कविता, व्यंग्य, नाटक, निबन्ध, आलोचना, विमर्श, बाल साहित्य, संस्मरण, यात्रा-वृत्तांत, सिनेमा, अनुवाद, विशेषांक आदि है। यह पत्रिका साहित्य की महत्वपूर्ण विधाओं को अपनी पत्रिका के द्वारा लोगों तक पहुँचाने में कारगर हो रही है। इस पत्रिका में रचनाकारों की संख्या लगभग 221 है । यह पत्रिका एक पंजीकृत पत्रिका है। इसका पंजीयन क्रमांक ISSN 3294-6687 है। इस पत्रिका के पाठकों में निरन्तर वृद्धी हो रही है। किसी विश्वविद्यालय से निकलने वाली साहित्य की यह पहली वेब पत्रिका है।  

लघुकथा http://www.laghukatha.com
लघुकथा सुकेश साहनी एवं रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ सम्पादकद्वय के द्वारा प्रकाशित होती है। यह वेब पत्रिका हिन्दी साहित्य की ‘लघुकथा’ विधा पर आधृत है। इस वेब पत्रिका में नौ महत्वपूर्ण स्तम्भ है जो इस प्रकार है- अध्ययन कक्ष, चर्चा में, दस्तावेज, देश, देशान्तर, पुस्तक, भाषान्तर, मेरी पसन्द तथा संचयन । ‘अध्ययन कक्ष‘ के अन्तर्गत समय, समाज और विमर्श की लघुकथाओं को स्थान मिला है। इसी तरह ‘चर्चा में’ के अन्तर्गत नये चर्चित लघुथाओं को रखा गया है। ‘देश‘ स्तम्भ के अन्तर्गत देश के अन्दर के लेखकों की लघुथाएं हैं तथा ‘देशान्तर’ स्तम्भ में विदेशी लेखकों की लघुकथाओं को स्थान मिला है। ‘भाषान्तर’ स्तम्भ में अन्य भारतीय भाषाओं की अनुदित लघुकथाओं को रखा गया है।
यह वेब पत्रिका पूर्ण रूप से लघुकथा विधा को समर्पित है। आभाषी दुनिया में इस वेब पत्रिका का लघुकथा विधा के क्षेत्र में कोई सानी नही है।


हिन्दी नेस्ट http://www.hindinest.com
इस पत्रिका की सम्पादक मनीषा कुलश्रेष्ठ है। यह वेब पत्रिका बोलोजी (www.boloji.com) की सहगामी है जो हिन्दी में निकलती है किन्तु ‘बोलोजी’ अंग्रेजी में निकलने वाली पत्रिका है। ‘बोलोजी’ वेब पत्रिका मूलतः हिन्दी की है किन्तु यह अंग्रेजी में निकलती है। बोलोजी का उद्देश्य हिन्दी के साहित्य को अंग्रेजी के माध्यम से हिन्दी साहित्य का विस्तार है। ऐसे प्रयास हिन्दी के क्षेत्र में कम ही हुए है। ‘हिन्दी नेस्ट‘ इन्ही पुनीत कार्यों का प्रतिफल है । यह पत्रिका हिन्दी में कहानी, कविता, निबन्ध, संस्मरण, साक्षात्कार, व्यंग्य आदि विधाओं पर केन्द्रित है। इन विधाओं के साथ-साथ इस वेब पत्रिका में कार्टून, कैशोर्य, दृष्टिकोण, देश-परदेश, बच्चों की दुनिया, रसोई, व्यक्तित्व जैसे स्तम्भ है। उक्त स्तम्भों को समाज के विभिन्न संदर्भों से जोड़ कर प्रस्तुत किया गया है। यह पत्रिका इन्टरनेट पर हिन्दी वेब पत्रिकाओं के शुरूआती दौर से चल रही है। इस पत्रिका ने इन्टरनेट  पर हिन्दी तथा साहित्य को विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

हस्ताक्षर http://www.hastaksher.com
हस्ताक्षर वेब पत्रिका प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर राजस्थान से निकलने वाली हिन्दी की व्यवस्थित पत्रिकाओं में एक है। इस पत्रिका का प्रकाशन अभी हाल ही के वर्ष 2015 में हुआ है। जब से यह पत्रिका निकली है तब से आजतक यह सुचारू रूप से प्रकाशित हो रही है। अब तक इस पत्रिका के 29 अंक आ चुके है। इस पत्रिका के प्रधान सम्पादक के.पी. अनमोल है वही संस्थापक एवं सम्पादक प्रीति ‘अज्ञात’ है। सम्पादक एवं सम्पादन मण्डल के अथक परिश्रम से यह पत्रिका हिन्दी वेब पत्रिकाओं में ‘हस्ताक्षर‘ बनती जा रही है। इस पत्रिका का आदर्श वाक्य “उत्कृष्ट साहित्य का मासिक दस्तावेज” है। यह वेब पत्रिका साहित्य की विविध विधाओं एवं विमर्शों को अपने पाठकों तक पहुँचाने में सफल रही है। यह पत्रिका मुख्य रूप से छः स्तम्भों मे विभक्त है जो इस प्रकार है- ‘मुख्यपृष्ठ’, ‘पूर्व अंक’, ‘रचनाकार’, ‘मूल्यांकन’, ‘ई-बुक्स’, ‘PDF अंक’ आदि। हस्ताक्षर एक पंजीकृत पत्रिका है इसका पंजीयन क्रमांक ISSN 2454-6984 है। साहित्यिक वेब पत्रिका के साथ-साथ यह शोध उत्कृष्ट शोध पत्रों को भी प्रकाशित करती है। इस वेब पत्रिका पर उपलब्ध साहित्य व आलेख के अवलोकनोपरान्त कहा जा सकता है कि उपलब्ध साहित्य पठनीय, विमर्श समकलीन, तथा आलेख स्तरीय है।  

हिन्दी कुंज http://www.hindikunj.com
यह वेब पत्रिका पूर्णतः हिन्दी को समर्पित है। ‘‘हिन्दी कुंज संपूर्णतः साहित्यिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दी के छात्रों, पाठकों एवं जिज्ञासु सुधी जनों का सहयोग करना है, इसके माध्यम से हिन्दी साहित्य से सम्बन्धित लगभग सभी विधाएँ इसमें संकलित करने का प्रयास किया जा रहा है।’’   यह पत्रिका आशुतोष दुबे के संपादन में निकलती है। इसका होम पेज एक आदर्श पत्रिका के प्रारूप से आच्छादित है। इसके प्रमुख स्तम्भ हिन्दी बुक, हिन्दी व्याकरण,  रचनाकारों की सूची, हिन्दी निबन्ध, लेख- संग्रह आदि हैं। इस पत्रिका की सबसे खास बात है लेटेस्ट न्यूज। लेटेस्ज न्यूज में नई प्रकाशित रचना को एक पट्टी में बराबर समाचार हेड लाइन के अनुसार चलाया जाता है। यह पत्रिका हिन्दी वेब पत्रिकाओं में अपना महत्त्वपूर्ण स्थान रखती हैं।  यह पत्रिका हिन्दी की समृद्ध वेब पत्रिकाओं में से एक है।

पूर्वाभास http://www.poorvabhas.in
पूर्वाभास उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से प्रकाशित होती है इसके सम्पादक अवनीश सिंह चैहान हैं। इस वेब पत्रिका का आदर्शवाक्य ‘‘शब्द साधकों की साधनास्थली है।”   इस वेब पत्रिका का उद्देश्य ‘‘हिन्दी साहित्य के सेवार्थ वरिष्ठ  रचनाकार और उभरते रचनाकारों को एक ही मंच पर उपस्थित कर हिन्दी को और अधिक सशक्त बनाना है।’’  वर्तमान में इस वेबसाइट पर हजारों पृष्ठों में साहित्य की उपलब्धता है। इस वेब पत्रिका के मुख्य स्तम्भों में आलेख, कविता, कहानी, समीक्षा, साक्षात्कार तथा विविध आदि हैं। ‘‘इस वेब पत्रिका को 2012 में ‘मिशीगन अमेरिकी द थिंक क्लब‘ द्वारा ‘बुक ऑफ द ईयर अवार्ड‘ से सम्मानित किया गया है।”

कलायन http://www.kalayan.org
कलायन पत्रिका हिन्दी वेब पत्रिका के शुरूआती दौर से चल रही है। इस पत्रिका का प्रकाशन ‘बैंगलोर’ से होता है इसके सम्पादक ‘मथुरा कलौनी’ जी हैं। आप एक सफल सम्पादक होने के साथ-साथ अच्छे नाटककार भी हैं। आपकी इस पत्रिका में साहित्य की प्रमुख विधाओं के अनुसार स्तम्भ विभाजित किए गये हैं जैसे- कहानी, कविता, हास्य-व्यंग्य, ललित-निबन्ध, उपन्यास, नाटक, मथुरा कालौनी की रचनाएँ, विचार विमर्श, किशोर-किशोरियों के लिए तथा विविधा आदि है। इस पत्रिका में नये पुराने दोनों प्रकार की रचनाकारों उपलब्ध रचनाएँ हैं।

शब्दांकन http://www.shabdankan.com
शब्दांकन हिन्दी की उन वेब पत्रिकाओं में है जो साहित्य के साथ-साथ राजनीति की उन खबरों को भी महत्त्व देती है जो समाज से जुड़ी हैं और गम्भीर हैं । ऐसी खबरों पर किसी लेखक द्वारा लेख लिखवाकर प्रकाशित किया जाता है। इस पत्रिका के प्रमुख स्तम्भ कहानी, कविता, आलेख, खबर, राजनैतिक, सम्पादकीय आदि है। यह पत्रिका समसामयिक घटनाओं पर पैनी नजर रखती है। समाज में जो घटनाएँ असाधारण घटती हैं उनका मूल्यांकन  कर विमर्श रूप में आलेख निकालती है। ‘शब्दांकन‘ हिन्दी वेब पत्रिकाओं में अपना विशिष्ट स्थान बनाए हुए हैं।

अनुरोध http://www.anurodh.net
मध्य प्रदेश हिन्दी वेब के विकास में अग्रणी राज्य है। यहीं से हिन्दी का पहला वेबपोर्टल ‘वेबदुनिया‘ की शुरूआत हुई थी। अनुरोध भोपाल से प्रकाशित होने वाली प्रमुख जाल पत्रिका है। इस पत्रिका के सम्पादक दुर्गेश गुप्त ‘राज’ हैं। इस पत्रिका का आदर्श वाक्य ‘‘भारतीय भाषाओं के प्रतिष्ठापन को समर्पित पत्रिका से है”   इस पत्रिका का उद्देश्य ‘‘विश्व जाल पत्रिका अनुरोध भारतीय भाषाओं के प्रतिष्ठापन के लिए समर्पित समस्त संस्थाओं को एक मंच पर लाने हेतु प्रयासरत है।’’  इस विश्व जाल पत्रिका का प्रकाशन एवं सम्पादन अवैतनिक, अव्यावसायिक एवं मानव सेवी होकर समस्त हिन्दी प्रेमियों को समर्पित है। इसका मूल उद्देश्य राष्ट्रभाषा हिन्दी एवं भारतीय भाषाओं की रक्षा एवं देवनागरी लिपि एवं अन्य भारतीय लिपियों की रक्षा करना है। इस जाल पत्रिका को अक्टूबर 2009 से अद्यतन किया गया है। पहले ये पत्रिका प्रिंट फार्मेट में निकलती थी अब यह इण्टरनेट के माध्यम से खूब पढ़ी जा रही है।

प्रतिलिपि  http://www.hindi.pratilipi.com
प्रतिलिपि डाटकॉम एक ऑनलाइन, पब्लिशिंग साहित्यिक अभियान है। यह पूर्ण रूप से वेब पत्रिका है। इसका कोई प्रिंट संस्करण नहीं निकलता है। प्रतिलिपि डाटकॉम की स्थापना बैंगलोर के सात युवा आई0टी0 प्रोफेशन से जुड़े लोगों के द्वारा की गयी है और इसका संचालन इन्हीं सात लोगों द्वारा किया जा रहा है। प्रतिलिपि का प्रकाशन हिन्दी के अलावा गुजराती, मराठी, तमिल और मलयालम में भी हो रहा है। यह पत्रिका समय-सयम पर लेखन के लिए पुरस्कार आयोजित करता रहता है। इनमें से कुछ प्रमुख पुरस्कार है- ‘बोलो के लव आजाद है, ‘प्रतिलिपि कविता सम्मान’, ‘प्रतिलिपि कथा सम्मान‘, ‘पत्र लेखन‘, ‘सीधा सवाल’ आदि। इस पत्रिका में जो मुख्य स्तम्भ है उनमें प्रेम कथाएं, संस्पेंस और थ्रीलर, हारर, अन्य कहानियाँ, उपन्यास, हास्य-व्यंग्य, काव्य-वाटिका, लेख, जीवनी एवं आत्मकथा, विचार-विमर्श, प्राचीन साहित्य, यात्रा-वृतांत, स्वाविकास एवं विकास, स्वास्थ्य सुख आदि हैं। संस्पेंस और थ्रीलर तथा हॉरर जैसे स्तम्भ को देखकर कहा जा सकता है कि यह सिनेमा से प्रभावित हिन्दी वेब पत्रिका है।

आरम्भ http://www.arambh.co.in
‘आरम्भ’ ऑनलाइन निकलने वाली पत्रिका है। इसका पहला अंक जुलाई-सितम्बर 2014 को निकला था। अब तक इसके आठ अंक प्रकाशित हो चुके हैं। इस पत्रिका के संचालक व प्रधान सम्पादक विकास कुमार है। यह पत्रिका नई दिल्ली से निकलती है। इस पत्रिका के प्रमुख स्तम्भ सम्पादकीय, आमने-सामने, यात्रा वृतान्त, विशेष लेख, कुछ कलम से, शोध पत्र, चिन्तन, विचार, लघुकथा, समीक्षा तथा ब्लॉग की गली आदि है। इस पत्रिका के द्वारा समय-समय पर विशेषांक भी प्रकाशित किये जाते है।

कृत्या http://www.kritya.in
‘कृत्या’ एक ऑनलाइन पत्रिका है और साथ ही यह एक कविता की पत्रिका है। जो हिन्दी सहित सभी भारतीय एवं वैश्विक भाषाओं में लिखी जाने वाली आधुनिक एवं प्राचीन कविता को हिन्दी के माध्यम से प्रस्तुत करती है। इस पत्रिका का उद्देश्य हिन्दी भाषा के प्रति सम्मान जगाना है। इस पत्रिका का पंजीकरण भी है जिसका पंजीयन क्रमांक ISSN : 0976-5158 है। यह पत्रिका डॉ. रति सक्सेना के सम्पादन में त्रिवेन्द्रम, केरल से निकलती है। इसकी शुरूआत 2009 में हुई थी। इस पत्रिका के  प्रमुख स्तम्भ में मेरी बात, समकालीन कविता, कविता के बारे में आदि है। यह पत्रिका कविता पर ही निकलती है। यह पत्रिका हिन्दी और अंग्रेजी दोनों में प्रकाशित होती है।

उदन्ती  http://www.udanti.com
‘उदन्ती’ का प्रकाशन रायपुर से होता है। ‘‘उदन्ती डाटकॉम एक मासिक वेब पत्रिका है। जो 2008 अगस्त से निरंतर जारी है।”   इस पत्रिका ने समसामयिक मुद्दों पर जैसे पर्यटन, पर्यावरण, प्रदूषण, लोककला, संस्कृति आदि विभिन्न विषयों के साथ-साथ साहित्य की विभिन्न विधाओं को भी शामिल कर रखा है। इस पत्रिका की सम्पादक डॉ. रत्ना वर्मा हैं।

सृजनगाथा  http://www.srijangatha.com
यह हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं से युक्त वेब पत्रिका है। ‘‘सृजनगाथा हिन्दी की एक ऑनलाइन वेब पत्रिका है। इसके सम्पादक जय प्रकाश मानस है।’’   यह पत्रिका इण्टरनेट पर एक अग्रणी पत्रिका है। इस पत्रिका के प्रमुख स्तम्भ हैं- लघुकथा, आलेख, कहानी, हलचल, कविता, व छन्द हैं। जय प्रकाश मानस वेब के अच्छे जानकार हैं। इनका अपना एक ब्लॉग है जिसका ई-पता www.jayprakashmanas.blogspot.in है। सृजनगाथा में जय प्रकाश मानस की कई रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं।

जनकृति  http://www.jankritipatrika.in
जनकृति पत्रिका की शुरूआत मार्च 2015 से हुई। इसने कम समय में हिन्दी जगत में अपनी पहचान बनाई है। इस पत्रिका के सम्पादक कुमार गौरव मिश्रा है। यह पत्रिका विमर्श केन्द्रित अंतरराष्ट्रीय मासिक ई-पत्रिका है। ‘‘जनकृति विमर्श केंद्रित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका है. सृजन के प्रत्येक क्षेत्र कविता, नवगीत, कहानी, लघु कथा, व्यंग्य, नाटक, सिनेमा, रंगमंच, आलोचना, समीक्षा में विमर्श को स्थापित करने के उद्देश्य से इस पत्रिका को निकाला जा रहा है। इसके अतिरिक्त पत्रिका में कई विमर्श स्तंभ है जैसे शोध विमर्श, बाल विमर्श, लोक विमर्श, सिने विमर्श, रंग विमर्श, स्त्री विमर्श, दलित एवं जनजाति विमर्श, भाषिक विमर्श, शिक्षा विमर्श एवं सम्पूर्ण विश्व में हिंदी के विकास हेतु हो रही गतिविधियों के लिए हिंदी विश्व नाम से स्तंभ रखा गया है। हम सृजन क्षेत्र से जुड़े सभी सृजनकर्मियों का पत्रिका में स्वागत करते हैं एवं आशा करते हैं कि आप विमर्श की दृष्टि से सार्थक लेखन की दिशा में हमारा सहयोग करेंगे। यह पत्रिका जहाँ एक ओर विश्व पटल पर सृजन क्षेत्र के प्रमुख हस्ताक्षरों को प्रस्तुत करती है वहीं दूसरी ओर सृजन क्षेत्र में कदम रख रहे नव लेखकों के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मंच भी प्रदान करती है।”   इसकी वेबसाइट पर मार्च 2015 से लेकर अप्रैल 2016 तक की पत्रिका PDF फार्मेट में पड़ी हुई है। जिसको भी पढ़ना है वह आसानी से इन पत्रिकाओं को पढ़ सकता है। इस पत्रिका का प्रकाशन गोरख पाण्डेय छात्रावास महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा से होता है।
उपर्युक्त जितनी पत्रिकाओं को लिया गया है वे सभी हिन्दी साहित्य की वेब पत्रिका हैं साथ ही ये सभी भारत से निकलने वाली पत्रिकाएँ हैं। इनमें उन पत्रिकाओं को नहीं लिया गया है जो पुरानी हैं तथा अपडेट नहीं की जा रही हैं। ऊपर जितनी भी पत्रिकाएँ हैं उनको देखकर यह प्रतीत होता है कि इनकी संख्या पर्याप्त नहीं है। आने वाले समय में इन पत्रिकाओ का गुणात्मक विकास होना आवश्यक है नहीं तो हिन्दी को आपेक्षित स्थान मिल पाना मुश्किल हो जायेगा।


विदेश से प्रकाशित हिन्दी साहित्य की वेब पत्रिकाएँ

हिन्दी साहित्य की वेब पत्रिकाएँ सिर्फ भारत से ही नही निकलती अपितु विदेशों से भी खूब निकल रही हैं इनका परिचय इस प्रकार है-

भारत दर्शन http://www.bharatdarshan.co.nz
भारत दर्शन पत्रिका न्यूजीलैण्ड से प्रकाशित होती है। इसके सम्पादक रोहित कुमार ‘हैप्पी‘ है। पहले यह पत्रिका प्रिंट प्रारूप में छपती थी किन्तु इण्टरनेट के आ जाने से यह अब ऑनलाइन है। भारत दर्शन का इण्टरनेट पर प्रथम प्रकाशन दिसम्बर-जनवरी 1996-97 में हुआ इस तरह ‘‘इण्टरनेट की दुनिया में हिन्दी साहित्यिक पत्रकारिता का उदय भारत-दर्शन के रूप में हो चुका था।’’  इस पत्रिका को हिन्दी साहित्य की प्रथम वेब पत्रिका होने का गौरव प्राप्त है। इण्टरनेट पर हिन्दी शिक्षण की शुरूआत भारत दर्शन ने की वो अलग बात है कि इसको विशेष उपलब्धि नहीं मिली।
भारत दर्शन की योजनाएं: भारत दर्शन हिन्दी के विकास में उत्तरोत्तर वृद्धि कर रहा है। इसी दृष्टि से रोहित कुमार हैप्पी ने दो योजनाएं बनाई जिस पर भारत दर्शन पिछले दो वर्षों से कार्य कर रहा है। पहली योजना- कहत कबीर को लेकर थी और दूसरी योजना साहित्य-दर्शन को लेकर।
कहत-कबीर: कहत कबीर भारत दर्शन का ही एक हिस्सा है बस यह कबीर के दोहों, सबद, साखी तथा किवंदतियों  पर आधारित है। ‘‘कहत कबीर पर कबीर का समग्र साहित्य प्रकाशित करने की योजना है। इसमें मुद्रित सामग्री, चित्र व वीडियो सम्मिलित होंगे कबीर की जीवनी उनके दोहे, भजन व प्रचलित किवंदन्तियां प्रकाशित हो। हम निरंतर इसमें और सामग्री सम्मिलित कर रहे हैं।’’ इस परियोजना के अन्तर्गत कबीर के साहित्य को इण्टरनेट के माध्यम से अन्तर्राष्ट्रीय मंच देना है। कहत कबीर का ई-पता http://www.kahatkabir.com है। इसका भी संचालन न्यूजीलैण्ड से ही होता है।


साहित्य दर्शन: इस परियोजना पर अभी कार्य चल रहा है। इसके अन्तर्गत प्रवासी भारतीयों के साहित्य को विशेष रूप से स्थान देने का कार्य किया जायेगा। जिससे हिन्दी जगत में प्रवासियों के द्वारा लिखा जा रहा साहित्य प्रकाश में आ सके।

अभिव्यक्ति  http://www.abhivyakti-hindi.org
1996 के अन्त तक हिन्दी इण्टरनेट पर अपना विकास नहीं कर पायी, अगर थी तो वह रोमन के रूप में, एक हिन्दी प्रेमी होने के नाते पूर्णिमा वर्मन ने सोचा कि ऐसे काम चलेगा नहीं, उन्होंने हिन्दी को उचित स्थान दिलाने के लिए एक टीम बनाई इस टीम में देश और विदेश से कई लोगों को जोड़ा। इस टीम में अश्विन गाँधी (कनाडा) ने तकनीकी का काम सम्भाला। प्रवीन सक्सेना अर्थ की मदद की। कला और सम्पादन खुद पूर्णिमा वर्मन ने सम्भाला तथा टाइपिंग व अन्य सहयोग दीपिका जोशी ने की। इन सब लोगों को मिलाकर जो टीम बनी उसमें सभी ने अपने-अपने इण्टरनेट खर्चे का वहन करने का निर्णय लिया। हर्ष कुमार जो कि भारतीय रेलवे में नौकरी करते थे इन्होंने अपने द्वारा बनाए गये फाण्ट को मुफ्त में पत्रिका को दिया। सबके सहयोग एवं कड़ी मेहनत से अभिव्यक्ति का पहला व्यवस्थित अंक 15 अगस्त 2000 को प्रकाशित हुआ। इस बार इसे 66 लोगों ने पढ़ा। ‘‘12 सितम्बर को इसका दूसरा अंक निकला जिसकी यात्रा के लिए 226 लोग आये और अगले महीने 338।’’   इस तरह धीरे-धीरे यह पत्रिका चर्चित हुई और इण्टरनेट पर खूब पढ़ी जाने लगी।
इस पत्रिका में जो प्रमुख स्तम्भ हैं उनमें आज सिरहाने, उपन्यास, उपहार, कहानियाँ, कला दीर्घा, कविताएँ, गौरवगाथा, पुराने अंक, नगरनामा, रचना प्रसंग, घर-परिवार, चौपाल, नाटक, परिक्रमा, पर्व-परिचय, प्रकृति, पर्यटन, प्रेरक प्रसंग, प्रौद्योगिकी, फुलवारी, रसोई, लेखक, विज्ञान वार्ता, विशेषांक, साहित्य, संगम, संस्करण, साहित्य, समाचार, साहित्यिक निबंध आदि हैं।  इस पत्रिका का प्रकाशन संयुक्त अरब अमीरात के  शारजाह से पाक्षिक होता है।


अनुभूति  http://www.anubhuti-hindi.org
यह पत्रिका पूर्णरूप से कविता को समर्पित पत्रिका है। जब अभिव्यक्ति पर कविताओं के प्रकाशन हेतु दबाव बनने लगा तो तत्काल पूर्णिमा वर्मन ने इण्टरनेट पर एक नई वेब पत्रिका बनाई जो अनुभूति के नाम से जानी जाती है। ‘‘इस तरह 1 जनवरी, 2001 को अनुभूति का जन्म हुआ।’’   इस पत्रिका के द्वारा देश विदेश के साहित्यकारों एवं नवोदित साहित्यकारों की रचनाओं का प्रकाशन किया गया।
1 सितम्बर 2007 को इन पत्रिकाओं को यूनिकोड फाण्ट पर ले आया गया। अब इनका प्रकाशन यूनिकोड में होने लगा और पुराने अंकों को भी यूनिकोड में बदला जाने लगा। पूर्णिमा वर्मन के अनुसार अभिव्यक्ति और अनुभूति केवल पत्रिकाएँ नहीं हैं, यह एक ऐसा पुस्तकालय है जिसमें हमने साहित्यिक रूचि के लोगों की प्रिय रचनाओं और उनके प्रत्यत्नों को सहेजा है। इस पत्रिका पर कई उदीयमान रचनाकारों को प्रसिद्धि मिली है। इन दोनों पत्रिकाओं का प्रकाशन आज भी निर्बाध रूप से संयुक्त अरब अमीरात से  हो रहा है। ये दोनों पत्रिकाएँ हिन्दी वेब पत्रिकाओं में अपना महत्त्वपूर्ण स्थान रखती हैं।


साहित्य कुंज  http://www.sahityakunj.net
साहित्य कुंज पत्रिका का प्रकाशन कनाडा से होता है। यह पत्रिका जुलाई 2016 तक अपने 111 अंक निकाल चुकी है। इस पत्रिका के सम्पादक सुभाष कुमार घई है। यह पत्रिका पंजीकृत पत्रिका है। इसका पंजीयन नं0 ISSN 2292-9754 है। इस पत्रिका का आदर्श वाक्य ‘‘अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली है।”
इस पत्रिका को दो भागों में बाँटा जा सकता है। 1. प्रकाशनगत, 2. विधागत
प्रकाशनगत: इसके अनुसार इसको एक पत्रिका के प्रारूप में ढाला गया है और इसके जो स्तम्भ हैं उनमें इस अंक की कहानियाँ, हास्य-व्यंग्य, सांस्कृतिक कथा, बाल साहित्य, लघु कथा, साक्षात्कार, आलेख श्रृंखला, साहित्य और सिनेमा, शोध-निबन्ध, आलेख, अनुदित साहित्य, कविताएं, शायरी, यात्रा संस्मरण, संकलन आदि हैं। ये स्तम्भ पत्रिकाओं में आयी रचनाओं के अनुसार बन
- अजीत कुमार सिंह

 
रचनाकार परिचय
अजीत कुमार सिंह

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