प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
सितंबर 2017
अंक -31

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

गीत-गंगा

गीत- अगर तुम नहीं मिलते

अगर तुम नहीं मिलते मुझको,
मन की साध कुँवारी होती।
कली हृदय की खिली न होती,
यह उदास फुलवारी होती।।

अगर चाँदनी नहीं बरसती,
उगे हुए अंकुर कुम्हलाते।
सृजन अधूरा ही रह जाता,
गीत विरह के गाये जाते।
अगर दीया तुम नहीं जलाते,
रात न ये उजियारी होती।।

मन की मेरे झिझक न मिटती,
पाँव थिरकने से रह जाते।
आँगन सूना ही रह जाता,
मंगल गीत रचे नहीं जाते।
जीवन भर साँसों के ऊपर,
तम की पहरेदारी होती।।

नृत्य न होता तुम बिन जीवन,
तुम बिन जीवन गीत न  होता।
जीवन क्या है बिना तुम्हारे,
उसका मर्म प्रतीत न होता।
बिना तुम्हारे जीवन जीना,
जीने की लाचारी होती।


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गीत- उम्मीदों की आशा हिन्दी

जन सामान्य की भाषा हिन्दी,
जन–मन की जिज्ञासा हिन्दी।
जन–जीवन में रची बसी, बन
जीवन की अभिलाषा हिन्दी।।

तुलसी-सूर की बानी हिन्दी,
विश्व की जन कल्याणी हिन्दी।
ध्वनित हो रही घर-आँगन में,
बनकर कथा-कहानी हिन्दी।
संकट के इस विषम दौर में,
उम्मीदों की आशा हिन्दी।।

गीत प्रेम के गाती हिन्दी,
सबको गले लगाती हिन्दी।
प्रेम-भाव से जीने का,
मन में उल्लास जगाती हिन्दी।
प्रेम-भाव से करती, सबके
मन की दूर निराशा हिन्दी।।

गीत राष्ट्र के गाने वाले,
हँसकर शीश कटाने वाले।
मातृभूमि की रक्षाहित,
अपना सर्वस्व लुटाने वाले।
राष्ट्रधर्म पर मिटने वाले,
वीरों की है गाथा हिन्दी।।

सेवा भाव सिखाती हिन्दी,
सबके मन को भाती हिन्दी।
सबके दिल की बातें करती,
सबका दिल बहलाती हिन्दी।
स्नेह, शील, सद्भाव, समन्वय
संयम की परिभाषा हिन्दी।।

 


- आचार्य बलवन्त
 
रचनाकार परिचय
आचार्य बलवन्त

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