प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
अगस्त 2017
अंक -39

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

ख़बरनामा

बाल कल्याण एवं बाल साहित्य शोध केन्द्र, भोपाल का नवां वार्षिकोत्सव एवं सम्मान समारोह



भोपाल। 'बाल कल्याण एवं बाल साहित्य शोध केंद्र, भोपाल' का 9 वाँ वार्षिकोत्सव एवं बाल साहित्यकार सम्मान समारोह, दिनांक 12 मई 2017 को भोपाल में श्यामला हिल्स के 'श्मानस भवन' में शाम 5 बजे आयोजित हुआ।
समारोह में श्रीमती निर्मला बारेला (सदस्य, म. प्र. बाल संरक्षण आयोग), डॉ. देवेंद्र दीपक (निदेशक, निराला सृजन पीठ), राजकुमार जैन 'राजन' (बाल साहित्यकार/संपादक) आकोला, राज. डॉ. भागीरथ कुमरावत (उपाध्यक्ष, माशिमं), ललित जैन (अध्यक्ष, चेम्बर ऑफ कॉमर्स), हरीश खंडेलवाल (समाजसेवी) मंचस्थ अतिथि के रूप में उपस्तिथ रहे। मंचस्थ अतिथियों ने केन्द्र के निदेशक महेश सक्सेना के इस प्रयास की भूरी-भूरी प्रशंसा की।
इस समारोह में उत्कृष्ठ बाल साहित्य सृजन करने वाले 14 रचनाकारों का सम्मान हुआ। बाल साहित्य की 6 उत्कृष्ठ पुस्तकों का लोकार्पण हुआ। तीन बाल प्रतिभाओं को भी सम्मानित किया गया।


केन्द्र में 'राजकुमार जैन राजन फाउंडेशन' (आकोला) द्वारा स्थापित , शिरोमणि सम्मान 'डॉ राष्ट्र्र बन्धु स्मृति वरिष्ठ बाल साहित्यकार सम्मान' श्री गोविंद शर्मा (संगरिया, राज.) को एवं 'डॉ श्री प्रसाद स्मृति वरिष्ठ बाल साहित्यकार सम्मान' श्री घमंडीलाल अग्रवाल (गुडगांव, हरियाणा) को प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मान स्वरूप 5100-5100 रूपये नगद, श्रीफल, प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिन्ह, श्रीफल, अंग वस्त्र भेट किए।
इस अवसर पर बाल साहित्यकार राजकुमार जैन 'राजन' ने कहा कि, "बाल साहित्यकार तो धरती पर भगवान द्वारा भेजे गए देवदूत हैं जो हमारे भावी नागरिकों में अपने साहित्य के द्वारा  संस्कारों का बीजारोपण करते हैं। बाल साहित्य ही संस्कार साहित्य है, जो कंकर को शंकर बनाने की क्षमता रखता है।"
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि, "आज साइबर दुनिया ने बच्चों से उनका बचपन छीन लिया है। बच्चे एकाकी, चिड़चिड़े व संस्कारहीन हो रहे हैं। समय रहते बच्चों को इससे बचाना होगा। यह काम अच्छा बाल साहित्य ही कर सकता है। हम सभी को अपने घरों में बाल साहित्य की पूस्तकें बच्चों को उपलब्ध करवानी चाहिए।"
समारोह में स्वागत उद्बोधन प्रसिद्ध गीतकार दिनेश प्रभात ने दिया, संचालन डॉ. साधना श्रीवास्तव ने किया। आभार प्रदर्शन श्रीमती आशा शर्मा ने किया।



इनका भी हुआ सम्मान
कार्यक्रम में करीब 14 बाल साहित्यकारों को स्मृति सम्मानों से विभूषित किया गया, जिसमें गंजबासौदा की श्रीमती पदमा चैगांवकर, इन्दौर की श्रीमती रंजना फतहपुर, जबलपुर की डॉ. सुनीता मिश्रा 'सुनीत', आगरा की डॉ. शशि गोयल, भोपाल की कीर्ति श्रीवास्तव, मनोरमा चोपड़ा, श्री अनिल अग्रवाल, विनिता राहुरिकर एवं जबलपुर की डॉ. संध्या शुक्ल भी शामिल थे। इसके अलावा श्रेष्ठ बाल पत्रिका के लिए सोहगपुर की 'फल जैसे बच्चों की पहल' और श्रेष्ठ बाल कवि के रुप में शाहजहांपुर, उ.प्र. की कु. सृष्टि पाण्डे को सम्मानित किया गया। वहीं बाल प्रतिभाओं के रुप में अमन चौधरी (चित्रकला) और अंशित भटनागर (खेल प्रतिभा) को सम्मानित किया गया। प्रत्येक को सम्मान स्वरुप एक हजार रुपये नगद, प्रतीक चिन्ह, प्रशस्ति पत्र, श्रीफल, अंग वस्त्र से अभिनंदित किया गया।


ये पुस्तकें हुईं लोकार्पित
'पानी रे पानी' (श्यामा गुप्ता 'दर्शना'), 'पुस्तक मित्र' (डॉ. विनिता राहूरिकर), 'चतुर्भुज्य' (डॉ. अरविन्द जैन), 'हिप-हिप हुर्रे हो' (अनिल अग्रवाल), 'भावी कर्णधार्य' (मनोरमा चौपड़ा) एवं 'सखी धीरे झुलैयो पालना' (मंजुलता श्रोती)




(रपट: कीर्ति श्रीवास्तव, भोपाल (म.प्र.)  सौजन्य: राजकुमार जैन 'राजन')


- आज़र ख़ान