हस्ताक्षर : मासिक साहित्यिक वेब पत्रिका
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
अक्टूबर 2018
अंक -44

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

संपादकीय
सर्वे भवन्तु सुखिनः     इस समय विश्व भर में जो हालात हैं और जिस तरह गोला-बारूद बनाते-बनाते विकास ने हमें मानव-बम तक पहुँचा दिया है, उसे देख 'शांति' की बात करना थोड़ा अचरज से तो भर ही देता है! पहले नुकीले पत्थर, भाले इत्यादि का प्रयोग जंगली जानवरों से स्वयं की सुरक्षा हेतु किया जाता था। चाकू-छुरी ने रसोई में मदद की लेकिन फिर आगे बढ़ने की चाहत में मनुष्यों ने इन्हें एक-दूसरे को घोंपने के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। इससे भी उसे शांति प्राप्त नहीं हुई तो ऐसे अत्याधुनिक हथियारों का निर्माण हुआ, जिससे एक बार में ही कई लोगों को सदा के लिए सुलाया जा सकता है। मानव अब भी ख़ुश नहीं था और स्वयं को सबसे अधिक ताक़तवर ....
 
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इस अंक में ......

आवरण: राजशेखर

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